Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 13.53.30: वह दिव्य अमृत को बिना किसी अशुद्धि के धारण करती है और दुहने पर अमृत ही देती है। वह अमृत का आधार है। सारा जगत उसके आगे नतमस्तक है॥30॥ | mahabharat अध्याय 13.53: राजा नहुषका एक गौके मोलपर च्यवन मुनिको खरीदना, मुनिके द्वारा गौओंका माहात्म्य-कथन तथा मत्स्यों और मल्लाहोंकी सद्गति । mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
वह दिव्य अमृत को बिना किसी अशुद्धि के धारण करती है और दुहने पर अमृत ही देती है। वह अमृत का आधार है। सारा जगत उसके आगे नतमस्तक है॥30॥
She holds the divine nectar without any impurities and gives only nectar when milked. She is the foundation of nectar. The whole world bows down before her.॥ 30॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥