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mahabharat 13.53.27: हे वीर राजन! गौओं के नाम और गुणों का कीर्तन, श्रवण, गौदान और दर्शन - ये शास्त्रों में बहुत प्रशंसनीय कहे गए हैं। ये सब कर्म समस्त पापों को दूर करके परम कल्याण की प्राप्ति कराने वाले हैं॥ 27॥   |   mahabharat अध्याय 13.53: राजा नहुषका एक गौके मोलपर च्यवन मुनिको खरीदना, मुनिके द्वारा गौओंका माहात्म्य-कथन तथा मत्स्यों और मल्लाहोंकी सद्‍गति   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 53: राजा नहुषका एक गौके मोलपर च्यवन मुनिको खरीदना, मुनिके द्वारा गौओंका माहात्म्य-कथन तथा मत्स्यों और मल्लाहोंकी सद्‍गति  »  श्लोक 27
 
 
श्लोक  13.53.27 
कीर्तनं श्रवणं दानं दर्शनं चापि पार्थिव।
गवां प्रशस्यते वीर सर्वपापहरं शिवम्॥ २७॥
 
 
अनुवाद
हे वीर राजन! गौओं के नाम और गुणों का कीर्तन, श्रवण, गौदान और दर्शन - ये शास्त्रों में बहुत प्रशंसनीय कहे गए हैं। ये सब कर्म समस्त पापों को दूर करके परम कल्याण की प्राप्ति कराने वाले हैं॥ 27॥
 
Brave king! Chanting and listening to the names and qualities of cows, donating cows and seeing them - these have been highly praised in the scriptures. All these acts remove all sins and lead to the attainment of supreme welfare.॥ 27॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)