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mahabharat 13.53.25: नहुष बोले, "हे ब्रह्मर्षि! हे पुण्यात्माओं में श्रेष्ठ! भृगुपुत्र! मैंने तुम्हें एक गाय देकर खरीदा है; अतः उठो, उठो, मैं यही तुम्हारा उचित मूल्य समझता हूँ।"   |   mahabharat अध्याय 13.53: राजा नहुषका एक गौके मोलपर च्यवन मुनिको खरीदना, मुनिके द्वारा गौओंका माहात्म्य-कथन तथा मत्स्यों और मल्लाहोंकी सद्‍गति   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 53: राजा नहुषका एक गौके मोलपर च्यवन मुनिको खरीदना, मुनिके द्वारा गौओंका माहात्म्य-कथन तथा मत्स्यों और मल्लाहोंकी सद्‍गति  »  श्लोक 25
 
 
श्लोक  13.53.25 
नहुष उवाच
उत्तिष्ठोत्तिष्ठ विप्रर्षे गवा क्रीतोऽसि भार्गव।
एतन्मूल्यमहं मन्ये तव धर्मभृतां वर॥ २५॥
 
 
अनुवाद
नहुष बोले, "हे ब्रह्मर्षि! हे पुण्यात्माओं में श्रेष्ठ! भृगुपुत्र! मैंने तुम्हें एक गाय देकर खरीदा है; अतः उठो, उठो, मैं यही तुम्हारा उचित मूल्य समझता हूँ।"
 
Nahusha said, "O Brahmarshi, the best of the virtuous! Son of Bhrigu! I have purchased you by giving you a cow; therefore, get up, get up, I consider this to be your fair price." 25.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)