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mahabharat 13.53.24: हे राजन! वे भृगुपुत्र महामुनि च्यवन के पास गए, जो कठोर व्रत का पालन कर रहे थे और उनसे इस प्रकार बोले, मानो उन्हें अपने वचनों से संतुष्ट कर रहे हों।   |   mahabharat अध्याय 13.53: राजा नहुषका एक गौके मोलपर च्यवन मुनिको खरीदना, मुनिके द्वारा गौओंका माहात्म्य-कथन तथा मत्स्यों और मल्लाहोंकी सद्‍गति   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 53: राजा नहुषका एक गौके मोलपर च्यवन मुनिको खरीदना, मुनिके द्वारा गौओंका माहात्म्य-कथन तथा मत्स्यों और मल्लाहोंकी सद्‍गति  »  श्लोक 24
 
 
श्लोक  13.53.24 
अभिगम्य भृगो: पुत्रं च्यवनं संशितव्रतम्।
इदं प्रोवाच नृपते वाचा संतर्पयन्निव॥ २४॥
 
 
अनुवाद
हे राजन! वे भृगुपुत्र महामुनि च्यवन के पास गए, जो कठोर व्रत का पालन कर रहे थे और उनसे इस प्रकार बोले, मानो उन्हें अपने वचनों से संतुष्ट कर रहे हों।
 
O King! He went to the great sage Cyavana, the son of Bhrigu, who was observing a strict vow, and spoke to him as if satisfying him with his words.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)