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mahabharat 13.53.19: यदि भगवान च्यवन मुनि क्रोधित हो जाएं तो वे तीनों लोकों को जलाकर भस्म कर सकते हैं; फिर मुझ जैसे आध्यात्मिक शक्ति से रहित तथा केवल शारीरिक बल पर निर्भर रहने वाले राजा को नष्ट करना उनके लिए कौन सी बड़ी बात है?   |   mahabharat अध्याय 13.53: राजा नहुषका एक गौके मोलपर च्यवन मुनिको खरीदना, मुनिके द्वारा गौओंका माहात्म्य-कथन तथा मत्स्यों और मल्लाहोंकी सद्‍गति   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 53: राजा नहुषका एक गौके मोलपर च्यवन मुनिको खरीदना, मुनिके द्वारा गौओंका माहात्म्य-कथन तथा मत्स्यों और मल्लाहोंकी सद्‍गति  »  श्लोक 19
 
 
श्लोक  13.53.19 
हन्याद्धि भगवान‍् क्रुद्धस्त्रैलोक्यमपि केवलम्।
किं पुनर्मां तपोहीनं बाहुवीर्यपरायणम्॥ १९॥
 
 
अनुवाद
यदि भगवान च्यवन मुनि क्रोधित हो जाएं तो वे तीनों लोकों को जलाकर भस्म कर सकते हैं; फिर मुझ जैसे आध्यात्मिक शक्ति से रहित तथा केवल शारीरिक बल पर निर्भर रहने वाले राजा को नष्ट करना उनके लिए कौन सी बड़ी बात है?
 
If Lord Chyavan Muni becomes angry, he can burn the three worlds to ashes; then what is a big deal for him to destroy a king like me who is devoid of any spiritual power and relies only on physical strength?
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)