Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 13.53.16-17: राजन्! मैं जानता हूँ कि ये मुनि किस प्रकार संतुष्ट होंगे। मैं इन्हें शीघ्र ही संतुष्ट कर दूँगा। मैंने कभी हँसी में भी झूठ नहीं बोला; फिर ऐसे समय में झूठ कैसे बोल सकता हूँ? मैं जो कुछ कहूँ, उसे तुम निःसंदेह करके करो।'॥16-17॥ | mahabharat अध्याय 13.53: राजा नहुषका एक गौके मोलपर च्यवन मुनिको खरीदना, मुनिके द्वारा गौओंका माहात्म्य-कथन तथा मत्स्यों और मल्लाहोंकी सद्गति । mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
राजन्! मैं जानता हूँ कि ये मुनि किस प्रकार संतुष्ट होंगे। मैं इन्हें शीघ्र ही संतुष्ट कर दूँगा। मैंने कभी हँसी में भी झूठ नहीं बोला; फिर ऐसे समय में झूठ कैसे बोल सकता हूँ? मैं जो कुछ कहूँ, उसे तुम निःसंदेह करके करो।'॥16-17॥
‘King! I know how this sage will be satisfied. I will satisfy him soon. I have never told a lie even in jest; then how can I tell a lie at such a time? Whatever I tell you, you should do it without any doubt.'॥ 16-17॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥