श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 53: राजा नहुषका एक गौके मोलपर च्यवन मुनिको खरीदना, मुनिके द्वारा गौओंका माहात्म्य-कथन तथा मत्स्यों और मल्लाहोंकी सद्‍गति  »  श्लोक 12
 
 
श्लोक  13.53.12 
नहुष उवाच
अर्धं राज्यं समग्रं वा निषादेभ्य: प्रदीयताम्।
एतन्मूल्यमहं मन्ये किं वान्यन्मन्यसे द्विज॥ १२॥
 
 
अनुवाद
नहुष ने कहा, "ब्राह्मण! यदि ऐसी बात है, तो मेरा आधा या पूरा राज्य इन मल्लाहों को दे दो। मैं यही तुम्हारा उचित मूल्य समझता हूँ। इसके अतिरिक्त तुम्हें और क्या चाहिए?"॥12॥
 
Nahush said, "Brahmin! If that is the case, then give half or all of my kingdom to these boatmen. I consider this to be a fair price for you. What else do you want apart from this?"॥12॥
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