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mahabharat 13.53.10: नहुष ने कहा, "पुजारी! कृपया इन निषादों को एक करोड़ मुद्राएँ मूल्य के रूप में दें और यदि यह उचित मूल्य न हो तो और अधिक दें।"   |   mahabharat अध्याय 13.53: राजा नहुषका एक गौके मोलपर च्यवन मुनिको खरीदना, मुनिके द्वारा गौओंका माहात्म्य-कथन तथा मत्स्यों और मल्लाहोंकी सद्‍गति   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 53: राजा नहुषका एक गौके मोलपर च्यवन मुनिको खरीदना, मुनिके द्वारा गौओंका माहात्म्य-कथन तथा मत्स्यों और मल्लाहोंकी सद्‍गति  »  श्लोक 10
 
 
श्लोक  13.53.10 
नहुष उवाच
कोटि: प्रदीयतां मूल्यं निषादेभ्य: पुरोहित।
यदेतदपि नो मूल्यमतो भूय: प्रदीयताम्॥ १०॥
 
 
अनुवाद
नहुष ने कहा, "पुजारी! कृपया इन निषादों को एक करोड़ मुद्राएँ मूल्य के रूप में दें और यदि यह उचित मूल्य न हो तो और अधिक दें।"
 
Nahusha said, "Priest! Please give these Nishads one crore coins as price and if this is not the right price then give more."
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)