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mahabharat 13.52.6: एक बार देवताओं को प्रणाम करके और अत्यन्त पवित्र होकर वह गंगा-यमुना के संगम पर जल में प्रवेश कर गया और वहाँ काठ के समान स्थिर होकर बैठ गया ॥6॥   |   mahabharat अध्याय 13.52: गौओंकी महिमाके प्रसंगमें च्यवन मुनिके उपाख्यानका आरम्भ, मुनिका मत्स्योंके साथ जालमें फँसकर जलसे बाहर आना   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 52: गौओंकी महिमाके प्रसंगमें च्यवन मुनिके उपाख्यानका आरम्भ, मुनिका मत्स्योंके साथ जालमें फँसकर जलसे बाहर आना  »  श्लोक 6
 
 
श्लोक  13.52.6 
स्थाणुभूत: शुचिर्भूूत्वा दैवतेभ्य: प्रणम्य च।
गंगायमुनयोर्मध्ये जलं सम्प्रविवेश ह॥ ६॥
 
 
अनुवाद
एक बार देवताओं को प्रणाम करके और अत्यन्त पवित्र होकर वह गंगा-यमुना के संगम पर जल में प्रवेश कर गया और वहाँ काठ के समान स्थिर होकर बैठ गया ॥6॥
 
Once after paying obeisance to the Gods and becoming very pure, he entered the water at the confluence of Ganga and Yamuna and sat there as still as a piece of wood. ॥ 6॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)