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mahabharat 13.52.4: वह अभिमान, क्रोध, हर्ष और शोक का त्याग करके कठोर व्रत का पालन करते हुए बारह वर्षों तक जल में रहा॥4॥   |   mahabharat अध्याय 13.52: गौओंकी महिमाके प्रसंगमें च्यवन मुनिके उपाख्यानका आरम्भ, मुनिका मत्स्योंके साथ जालमें फँसकर जलसे बाहर आना   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 52: गौओंकी महिमाके प्रसंगमें च्यवन मुनिके उपाख्यानका आरम्भ, मुनिका मत्स्योंके साथ जालमें फँसकर जलसे बाहर आना  »  श्लोक 4
 
 
श्लोक  13.52.4 
निहत्य मानं क्रोधं च प्रहर्षं शोकमेव च।
वर्षाणि द्वादश मुनिर्जलवासे धृतव्रत:॥ ४॥
 
 
अनुवाद
वह अभिमान, क्रोध, हर्ष और शोक का त्याग करके कठोर व्रत का पालन करते हुए बारह वर्षों तक जल में रहा॥4॥
 
Giving up pride, anger, joy and grief, he remained in water for twelve years, strictly observing a fast.॥ 4॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)