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mahabharat 13.52.3: भरतश्रेष्ठ! प्राचीन समय की बात है, भृगु के पुत्र महर्षि च्यवन ने महान व्रत का आश्रय लिया और जल के भीतर रहने लगे॥3॥   |   mahabharat अध्याय 13.52: गौओंकी महिमाके प्रसंगमें च्यवन मुनिके उपाख्यानका आरम्भ, मुनिका मत्स्योंके साथ जालमें फँसकर जलसे बाहर आना   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 52: गौओंकी महिमाके प्रसंगमें च्यवन मुनिके उपाख्यानका आरम्भ, मुनिका मत्स्योंके साथ जालमें फँसकर जलसे बाहर आना  »  श्लोक 3
 
 
श्लोक  13.52.3 
पुरा महर्षिश्च्यवनो भार्गवो भरतर्षभ।
उदवासकृतारम्भो बभूव स महाव्रत:॥ ३॥
 
 
अनुवाद
भरतश्रेष्ठ! प्राचीन समय की बात है, भृगु के पुत्र महर्षि च्यवन ने महान व्रत का आश्रय लिया और जल के भीतर रहने लगे॥3॥
 
Bharatshrestha! It is a matter of ancient times, Maharishi Chyavan, son of Bhrigu, took refuge in a great fast and started living under water. 3॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)