Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 13.52.26: मैं इन मछलियों के साथ या तो प्राण त्याग दूँगा या अपने प्राण बचाऊँगा। ये मेरी संगिनी हैं। मैं इनके साथ बहुत समय तक जल में रहा हूँ; इसलिए मैं इन्हें त्याग नहीं सकता।॥26॥ | mahabharat अध्याय 13.52: गौओंकी महिमाके प्रसंगमें च्यवन मुनिके उपाख्यानका आरम्भ, मुनिका मत्स्योंके साथ जालमें फँसकर जलसे बाहर आना । mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
प्राणोत्सर्गं विसर्गं वा मत्स्यैर्यास्याम्यहं सह।
संवासान्नोत्सहे त्यक्तुं सलिलेऽध्युषितानहम्॥ २६॥
अनुवाद
मैं इन मछलियों के साथ या तो प्राण त्याग दूँगा या अपने प्राण बचाऊँगा। ये मेरी संगिनी हैं। मैं इनके साथ बहुत समय तक जल में रहा हूँ; इसलिए मैं इन्हें त्याग नहीं सकता।॥26॥
‘I will either sacrifice or save my life along with these fishes. They have been my companions. I have lived with them in water for a long time; therefore I cannot abandon them.’॥ 26॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥