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mahabharat 13.52.22-23: दूसरी ओर, जाल के आकर्षण के कारण अत्यधिक पीड़ा, भय और भूमि के संपर्क में आने से अनेक मछलियाँ मर गईं। जब ऋषि ने मछलियों का यह संहार देखा, तो उन्हें बहुत दुःख हुआ और वे बार-बार गहरी साँसें लेने लगे।   |   mahabharat अध्याय 13.52: गौओंकी महिमाके प्रसंगमें च्यवन मुनिके उपाख्यानका आरम्भ, मुनिका मत्स्योंके साथ जालमें फँसकर जलसे बाहर आना   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 52: गौओंकी महिमाके प्रसंगमें च्यवन मुनिके उपाख्यानका आरम्भ, मुनिका मत्स्योंके साथ जालमें फँसकर जलसे बाहर आना  »  श्लोक 22-23
 
 
श्लोक  13.52.22-23 
परिखेदपरित्रासाज्जालस्याकर्षणेन च।
मत्स्या बभूवुर्व्यापन्ना: स्थलसंस्पर्शनेन च॥ २२॥
स मुनिस्तत् तदा दृष्ट्वा मत्स्यानां कदनं कृतम्।
बभूव कृपयाविष्टो नि:श्वसंश्च पुन: पुन:॥ २३॥
 
 
अनुवाद
दूसरी ओर, जाल के आकर्षण के कारण अत्यधिक पीड़ा, भय और भूमि के संपर्क में आने से अनेक मछलियाँ मर गईं। जब ऋषि ने मछलियों का यह संहार देखा, तो उन्हें बहुत दुःख हुआ और वे बार-बार गहरी साँसें लेने लगे।
 
On the other hand, many fishes died due to extreme pain, fear and coming in contact with the ground because of the attraction of the net. When the sage saw this carnage of fishes, he felt very sorry and started taking deep breaths again and again.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)