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mahabharat 13.52.21: वेदों के ज्ञाता उस विद्वान ऋषि को जाल में घसीटते देख, सब मल्लाह हाथ जोड़कर और सिर झुकाकर भूमि पर गिर पड़े।   |   mahabharat अध्याय 13.52: गौओंकी महिमाके प्रसंगमें च्यवन मुनिके उपाख्यानका आरम्भ, मुनिका मत्स्योंके साथ जालमें फँसकर जलसे बाहर आना   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 52: गौओंकी महिमाके प्रसंगमें च्यवन मुनिके उपाख्यानका आरम्भ, मुनिका मत्स्योंके साथ जालमें फँसकर जलसे बाहर आना  »  श्लोक 21
 
 
श्लोक  13.52.21 
तं जालेनोद्‍धृतं दृष्ट्वा ते तदा वेदपारगम्।
सर्वे प्राञ्जलयो दाशा: शिरोभि: प्रापतन् भुवि॥ २१॥
 
 
अनुवाद
वेदों के ज्ञाता उस विद्वान ऋषि को जाल में घसीटते देख, सब मल्लाह हाथ जोड़कर और सिर झुकाकर भूमि पर गिर पड़े।
 
Seeing that learned sage, well versed in the Vedas, being pulled by the net, all the boatmen fell on the ground with folded hands and bowed heads.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)