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mahabharat 13.52.19: महाराज! जाल खींचते समय भगवान की इच्छा से मछुआरों ने मछलियों से घिरे हुए भृगुपुत्र महर्षि च्यवन को भी जाल में खींच लिया॥19॥   |   mahabharat अध्याय 13.52: गौओंकी महिमाके प्रसंगमें च्यवन मुनिके उपाख्यानका आरम्भ, मुनिका मत्स्योंके साथ जालमें फँसकर जलसे बाहर आना   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 52: गौओंकी महिमाके प्रसंगमें च्यवन मुनिके उपाख्यानका आरम्भ, मुनिका मत्स्योंके साथ जालमें फँसकर जलसे बाहर आना  »  श्लोक 19
 
 
श्लोक  13.52.19 
तथा मत्स्यै: परिवृतं च्यवनं भृगुनन्दनम्।
आकर्षयन्महाराज जालेनाथ यदृच्छया॥ १९॥
 
 
अनुवाद
महाराज! जाल खींचते समय भगवान की इच्छा से मछुआरों ने मछलियों से घिरे हुए भृगुपुत्र महर्षि च्यवन को भी जाल में खींच लिया॥19॥
 
Maharaj! While pulling the net, the fishermen, by the will of God, also pulled in Bhrigu's son Maharishi Cyavana who was surrounded by fishes.॥ 19॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)