Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 13.52.14: हे भरतवंशी राजा! उस समय वे गहरे जल में गए जहाँ मछलियाँ थीं और उन्होंने अपना जाल पूरी तरह फैला दिया ॥14॥   |   mahabharat अध्याय 13.52: गौओंकी महिमाके प्रसंगमें च्यवन मुनिके उपाख्यानका आरम्भ, मुनिका मत्स्योंके साथ जालमें फँसकर जलसे बाहर आना   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 52: गौओंकी महिमाके प्रसंगमें च्यवन मुनिके उपाख्यानका आरम्भ, मुनिका मत्स्योंके साथ जालमें फँसकर जलसे बाहर आना  »  श्लोक 14
 
 
श्लोक  13.52.14 
जालं ते योजयामासुर्नि:शेषेण जनाधिप।
मत्स्योदकं समासाद्य तदा भरतसत्तम॥ १४॥
 
 
अनुवाद
हे भरतवंशी राजा! उस समय वे गहरे जल में गए जहाँ मछलियाँ थीं और उन्होंने अपना जाल पूरी तरह फैला दिया ॥14॥
 
O King of the Bharata dynasty! At that time, he went into the deep waters where fish were found and spread his net completely. ॥ 14॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)