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mahabharat 13.52.10: वह जलचरों को बहुत प्रिय हो गया था। जलचर उसके होठों को खुशी से सूंघते थे।   |   mahabharat अध्याय 13.52: गौओंकी महिमाके प्रसंगमें च्यवन मुनिके उपाख्यानका आरम्भ, मुनिका मत्स्योंके साथ जालमें फँसकर जलसे बाहर आना   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 52: गौओंकी महिमाके प्रसंगमें च्यवन मुनिके उपाख्यानका आरम्भ, मुनिका मत्स्योंके साथ जालमें फँसकर जलसे बाहर आना  »  श्लोक 10
 
 
श्लोक  13.52.10 
जलौकसां स सत्त्वानां बभूव प्रियदर्शन:।
उपाजिघ्रन्त च तदा तस्योष्ठं हृष्टमानसा:॥ १०॥
 
 
अनुवाद
वह जलचरों को बहुत प्रिय हो गया था। जलचर उसके होठों को खुशी से सूंघते थे।
 
He had become very dear to the aquatic creatures. The aquatic animals used to sniff his lips happily.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)