Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 13.51.25: बेटा! यदि माता का वर्ण और गोत्र निश्चित हो, तो बालक का संस्कार करने के लिए माता का वर्ण और गोत्र ही अपनाना चाहिए। कानिन और अध्युधज- ये दोनों प्रकार के पुत्र नीच श्रेणी के माने जाने योग्य हैं। 25॥ | mahabharat अध्याय 13.51: नाना प्रकारके पुत्रोंका वर्णन । mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
संस्कर्तुं वर्णगोत्रं च मातृवर्णविनिश्चये।
कानीनाध्यूढजौ वापि विज्ञेयौ पुत्र किल्बिषौ॥ २५॥
अनुवाद
बेटा! यदि माता का वर्ण और गोत्र निश्चित हो, तो बालक का संस्कार करने के लिए माता का वर्ण और गोत्र ही अपनाना चाहिए। कानिन और अध्युधज- ये दोनों प्रकार के पुत्र नीच श्रेणी के माने जाने योग्य हैं। 25॥
Son! If the varna and gotra of the mother is determined, then the mother's varna and gotra should be adopted to perform the rituals of the child. Kanin and Adhyudhaj – both these types of sons deserve to be considered as of the lowest category. 25॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥