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mahabharat 13.51.2: पुत्र-जन्म के विषय में अनेक प्रकार की बातें सुनी जाती हैं। हे राजन! हम इस विषय में असमंजस में हैं और किसी भी बात का निश्चय नहीं कर पा रहे हैं; अतः आप हमारी इस शंका का निवारण कीजिए॥ 2॥   |   mahabharat अध्याय 13.51: नाना प्रकारके पुत्रोंका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 51: नाना प्रकारके पुत्रोंका वर्णन  »  श्लोक 2
 
 
श्लोक  13.51.2 
विप्रवादा: सुबहव: श्रूयन्ते पुत्रकारिता:।
अत्र नो मुह्यतां राजन् संशयं छेत्तुमर्हसि॥ २॥
 
 
अनुवाद
पुत्र-जन्म के विषय में अनेक प्रकार की बातें सुनी जाती हैं। हे राजन! हम इस विषय में असमंजस में हैं और किसी भी बात का निश्चय नहीं कर पा रहे हैं; अतः आप हमारी इस शंका का निवारण कीजिए॥ 2॥
 
Many different things are heard about the birth of a son. O King! We are confused about this matter and are unable to decide anything; therefore, please remove this doubt of ours.॥ 2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)