Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 13.51.18: भरतनंदन! कभी-कभी कृत्रिम पुत्र भी देखने को मिलता है। उसे स्वीकार करने मात्र से या अपना मान लेने मात्र से वह आपका हो जाता है। वहाँ न वीर्य और न ही क्षेत्र उसके पुत्रत्व के निर्धारण का कारण प्रतीत होता है। | mahabharat अध्याय 13.51: नाना प्रकारके पुत्रोंका वर्णन । mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
क्वचिच्च कृतक: पुत्र: संग्रहादेव लक्ष्यते।
न तत्र रेत: क्षेत्रं वा यत्र लक्ष्येत भारत॥ १८॥
अनुवाद
भरतनंदन! कभी-कभी कृत्रिम पुत्र भी देखने को मिलता है। उसे स्वीकार करने मात्र से या अपना मान लेने मात्र से वह आपका हो जाता है। वहाँ न वीर्य और न ही क्षेत्र उसके पुत्रत्व के निर्धारण का कारण प्रतीत होता है।
Bharatanandan! Sometimes we can also see an artificial son. He becomes yours just by accepting him or accepting him as your own. There, neither the semen nor the area seems to be the reason for the determination of his sonship.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥