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mahabharat 13.51.10-11: वैश्य और क्षत्रिय के गर्भ से उत्पन्न पुत्र दो प्रकार के होते हैं - मागध और वामक। क्षत्रिय का केवल एक ही ऐसा पुत्र देखा जाता है जो ब्राह्मण स्त्री से उत्पन्न होता है। उसे सूत कहते हैं। ये छह पुत्र अपसद या प्रतिलोम माने जाते हैं। हे मनुष्यों के स्वामी! इन पुत्रों को मिथ्या नहीं कहा जा सकता। 10-11।   |   mahabharat अध्याय 13.51: नाना प्रकारके पुत्रोंका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 51: नाना प्रकारके पुत्रोंका वर्णन  »  श्लोक 10-11
 
 
श्लोक  13.51.10-11 
मागधो वामकश्चैव द्वौ वैश्यस्योपलक्षितौ।
ब्राह्मण्यां क्षत्रियायां च क्षत्रियस्यैक एव तु॥ १०॥
ब्राह्मण्यां लक्ष्यते सूत इत्येतेऽपसदा: स्मृता:।
पुत्रा ह्येते न शक्यन्ते मिथ्याकर्तुं नराधिप॥ ११॥
 
 
अनुवाद
वैश्य और क्षत्रिय के गर्भ से उत्पन्न पुत्र दो प्रकार के होते हैं - मागध और वामक। क्षत्रिय का केवल एक ही ऐसा पुत्र देखा जाता है जो ब्राह्मण स्त्री से उत्पन्न होता है। उसे सूत कहते हैं। ये छह पुत्र अपसद या प्रतिलोम माने जाते हैं। हे मनुष्यों के स्वामी! इन पुत्रों को मिथ्या नहीं कहा जा सकता। 10-11।
 
The sons born to a Vaishya from the womb of a Brahmin woman and a Kshatriya are of two types, namely Magadh and Vamaka. Only one such son is seen of a Kshatriya, who is born to a Brahmin woman. He is called Sut. These six are considered to be Apasad or Pratilom sons. O Lord of men! These sons cannot be called false. 10-11.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)