| श्री महाभारत » पर्व 13: अनुशासन पर्व » अध्याय 50: वर्णसंकर संतानोंकी उत्पत्तिका विस्तारसे वर्णन » श्लोक 8 |
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| | | | श्लोक 13.50.8  | द्वे चापि भार्ये वैश्यस्य द्वयोरात्मास्य जायते।
शूद्रा शूद्रस्य चाप्येका शूद्रमेव प्रजायते॥ ८॥ | | | | | | अनुवाद | | वैश्य की दो पुत्रियाँ हैं - वैश्य और शूद्रा। उन दोनों के गर्भ से उत्पन्न पुत्र वैश्य होता है। शूद्र की एक ही पत्नी होती है, शूद्रा, जो शूद्रों को ही जन्म देती है। 8॥ | | | | Vaishya has two daughters – Vaishya and Shudra. The son born from the womb of both of them is a Vaishya. Shudra has only one wife, Shudra, who gives birth to only Shudras. 8॥ | | ✨ ai-generated | | |
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