श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 50: वर्णसंकर संतानोंकी उत्पत्तिका विस्तारसे वर्णन  »  श्लोक 7
 
 
श्लोक  13.50.7 
तिस्र: क्षत्रियसम्बन्धाद् द्वयोरात्मास्य जायते।
हीनवर्णास्तृतीयायां शूद्रा उग्रा इति स्मृति:॥ ७॥
 
 
अनुवाद
क्षत्रिय की तीन पत्नियाँ होती हैं - क्षत्रिय, वैश्य और शूद्रा। इनमें से क्षत्रिय और वेश्या के संयोग से उत्पन्न पुत्र क्षत्रिय होता है। तीसरी शूद्रा के गर्भ से निम्न जाति के शूद्र ही उत्पन्न होते हैं; जिनकी संज्ञा उग्र है। ऐसा शास्त्रों का कथन है। 7॥
 
Kshatriya has three wives – Kshatriya, Vaishya and Shudra. Of these, the son born from the union of a Kshatriya and a prostitute is a Kshatriya. From the womb of the third Shudra, only low caste Shudras are born; Whose noun is fierce. Such is the statement of the scriptures. 7॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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