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mahabharat 13.50.49: मनुष्य अपने अच्छे-बुरे कर्मों, चरित्र, व्यवहार और कुल के द्वारा अपना परिचय देता है। यदि उसका कुल नष्ट भी हो जाए, तो भी वह अपने कर्मों के द्वारा शीघ्र ही उसे पुनः प्रकाश में लाता है ॥49॥   |   mahabharat अध्याय 13.50: वर्णसंकर संतानोंकी उत्पत्तिका विस्तारसे वर्णन   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 50: वर्णसंकर संतानोंकी उत्पत्तिका विस्तारसे वर्णन  »  श्लोक 49
 
 
श्लोक  13.50.49 
आत्मानमाख्याति हि कर्मभिर्नर:
सुशीलचारित्रकुलै: शुभाशुभै:।
प्रणष्टमप्याशु कुलं तथा नर:
पुन: प्रकाशं कुरुते स्वकर्मत:॥ ४९॥
 
 
अनुवाद
मनुष्य अपने अच्छे-बुरे कर्मों, चरित्र, व्यवहार और कुल के द्वारा अपना परिचय देता है। यदि उसका कुल नष्ट भी हो जाए, तो भी वह अपने कर्मों के द्वारा शीघ्र ही उसे पुनः प्रकाश में लाता है ॥49॥
 
A man introduces himself through his good and bad deeds, character, behaviour and family. Even if his family is destroyed, he soon brings it back to light through his deeds. ॥ 49॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)