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श्लोक 13.50.45  |
आर्यरूपसमाचारं चरन्तं कृतके पथि।
सुवर्णमन्यवर्णं वा स्वशीलं शास्ति निश्चये॥ ४५॥ |
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| अनुवाद |
| जो मनुष्य कृत्रिम मार्ग अपनाता है और श्रेष्ठ पुरुषों के समान आचरण करता है, वह सोना है या काँच - शुद्ध रंग का या मिश्रित रंग का ? इसका निर्णय करते समय उसका स्वभाव ही सब कुछ बता देता है ॥ 45॥ |
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| One who adopts artificial paths and behaves like the best of men, is he gold or glass - of pure colour or of mixed colour? When deciding this, his nature itself tells everything. ॥ 45॥ |
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