श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 50: वर्णसंकर संतानोंकी उत्पत्तिका विस्तारसे वर्णन  »  श्लोक 45
 
 
श्लोक  13.50.45 
आर्यरूपसमाचारं चरन्तं कृतके पथि।
सुवर्णमन्यवर्णं वा स्वशीलं शास्ति निश्चये॥ ४५॥
 
 
अनुवाद
जो मनुष्य कृत्रिम मार्ग अपनाता है और श्रेष्ठ पुरुषों के समान आचरण करता है, वह सोना है या काँच - शुद्ध रंग का या मिश्रित रंग का ? इसका निर्णय करते समय उसका स्वभाव ही सब कुछ बता देता है ॥ 45॥
 
One who adopts artificial paths and behaves like the best of men, is he gold or glass - of pure colour or of mixed colour? When deciding this, his nature itself tells everything. ॥ 45॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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