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श्लोक 13.50.42  |
पित्र्यं वा भजते शीलं मातृजं वा तथोभयम्।
न कथंचन संकीर्ण: प्रकृतिं स्वां नियच्छति॥ ४२॥ |
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| अनुवाद |
| वर्णसंकर मनुष्य अपने पिता या माता अथवा दोनों के स्वभाव का अनुसरण करता है। वह अपने स्वभाव को किसी भी प्रकार छिपा नहीं सकता ॥42॥ |
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| A man of mixed caste follows the nature of his father or mother or both. He cannot hide his nature in any way. ॥ 42॥ |
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