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mahabharat 13.50.41: इस संसार में असभ्यता, अनाचार, क्रूरता और आलस्य आदि दोष यह सिद्ध करते हैं कि मनुष्य अशुद्ध गर्भ (संकर जाति) से उत्पन्न हुआ है। ॥41॥   |   mahabharat अध्याय 13.50: वर्णसंकर संतानोंकी उत्पत्तिका विस्तारसे वर्णन   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 50: वर्णसंकर संतानोंकी उत्पत्तिका विस्तारसे वर्णन  »  श्लोक 41
 
 
श्लोक  13.50.41 
अनार्यत्वमनाचार: क्रूरत्वं निष्क्रियात्मता।
पुरुषं व्यञ्जयन्तीह लोके कलुषयोनिजम्॥ ४१॥
 
 
अनुवाद
इस संसार में असभ्यता, अनाचार, क्रूरता और आलस्य आदि दोष यह सिद्ध करते हैं कि मनुष्य अशुद्ध गर्भ (संकर जाति) से उत्पन्न हुआ है। ॥41॥
 
In this world, faults like uncivilisation, incest, cruelty and laziness prove that a man is born from an impure womb (of a hybrid caste). ॥ 41॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)