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mahabharat 13.50.40: भीष्म बोले, "युधिष्ठिर! जो मनुष्य दूषित गर्भ में जन्म लेता है, वह सज्जनों के आचरण के विपरीत अनेक प्रकार के कार्यों में प्रवृत्त होता है; अतः वह अपने कर्मों से पहचाना जाता है। इसी प्रकार सज्जनतापूर्वक आचरण करके गर्भ की पवित्रता का ज्ञान प्राप्त करना चाहिए ॥40॥   |   mahabharat अध्याय 13.50: वर्णसंकर संतानोंकी उत्पत्तिका विस्तारसे वर्णन   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 50: वर्णसंकर संतानोंकी उत्पत्तिका विस्तारसे वर्णन  »  श्लोक 40
 
 
श्लोक  13.50.40 
भीष्म उवाच
योनिसंकलुषे जातं नानाभावसमन्वितम्।
कर्मभि: सज्जनाचीर्णैर्विज्ञेया योनिशुद्धता॥ ४०॥
 
 
अनुवाद
भीष्म बोले, "युधिष्ठिर! जो मनुष्य दूषित गर्भ में जन्म लेता है, वह सज्जनों के आचरण के विपरीत अनेक प्रकार के कार्यों में प्रवृत्त होता है; अतः वह अपने कर्मों से पहचाना जाता है। इसी प्रकार सज्जनतापूर्वक आचरण करके गर्भ की पवित्रता का ज्ञान प्राप्त करना चाहिए ॥40॥
 
Bhishma said, "Yudhishthira! One who is born in a polluted womb engages in various activities which are contrary to the conduct of good men; hence he is identified by his deeds. Similarly, one should gain knowledge of the purity of womb by behaving in a gentlemanly manner. ॥ 40॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)