श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 50: वर्णसंकर संतानोंकी उत्पत्तिका विस्तारसे वर्णन  »  श्लोक 38
 
 
श्लोक  13.50.38 
स्वभावश्चैव नारीणां नराणामिह दूषणम्।
अत्यर्थं न प्रसज्जन्ते प्रमदासु विपश्चित:॥ ३८॥
 
 
अनुवाद
इस संसार में पुरुषों की निन्दा करना स्त्रियों का स्वभाव है; इसलिए विवेकशील पुरुष युवा स्त्रियों में अधिक आसक्त नहीं होते ॥38॥
 
In this world it is the nature of women to defame men; therefore prudent men do not get too attached to young women. ॥ 38॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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