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श्लोक 13.50.37  |
अविद्वांसमलं लोके विद्वांसमपि वा पुन:।
नयन्ति ह्यपथं नार्य: कामक्रोधवशानुगम्॥ ३७॥ |
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| अनुवाद |
| चाहे मूर्ख हो या विद्वान, स्त्रियाँ काम और क्रोध के वशीभूत मनुष्य को अवश्य ही गलत मार्ग पर ले जाती हैं। 37. |
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| Be it a fool or a learned person, women surely lead a man under the influence of lust and anger to the wrong path. 37. |
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