Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 13.50.36: राजन! ऋषियों और मुनियों द्वारा दी गई सलाह के अनुसार बुद्धिमान पुरुष को उक्त वर्ण और जाति की स्त्रियों में अपना हित भली-भाँति विचार करके ही सन्तान उत्पन्न करनी चाहिए; क्योंकि नीच योनि में उत्पन्न पुत्र भवसागर से पार जाने की इच्छा रखने वाले अपने पिता को उसी प्रकार डुबो देता है, जैसे गले में बंधा हुआ पत्थर जल की तलहटी में तैरते हुए मनुष्य को डुबो देता है॥36॥ | mahabharat अध्याय 13.50: वर्णसंकर संतानोंकी उत्पत्तिका विस्तारसे वर्णन । mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
राजन! ऋषियों और मुनियों द्वारा दी गई सलाह के अनुसार बुद्धिमान पुरुष को उक्त वर्ण और जाति की स्त्रियों में अपना हित भली-भाँति विचार करके ही सन्तान उत्पन्न करनी चाहिए; क्योंकि नीच योनि में उत्पन्न पुत्र भवसागर से पार जाने की इच्छा रखने वाले अपने पिता को उसी प्रकार डुबो देता है, जैसे गले में बंधा हुआ पत्थर जल की तलहटी में तैरते हुए मनुष्य को डुबो देता है॥36॥
Rajan! According to the advice given by sages and sages, an intelligent man should give birth to a child only after carefully considering his own welfare among the women of the mentioned castes and castes; Because a son born in a lowly womb drowns his father who wishes to cross the ocean of life, just as a stone tied around the neck drowns a man swimming in the bottom of the water. 36॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥