Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 13.50.31: जो लोग जाति का विचार न करके अपनी इच्छा से अन्य जातियों की स्त्रियों के साथ मैथुन करते हैं और जो यज्ञ करने के अधिकार से वंचित हैं, तथा साधु पुरुषों से भी वंचित हैं, ऐसे जाति से बाहर के पुरुषों से ही संकर संतानें उत्पन्न होती हैं और वे अपनी इच्छानुसार कार्य करते हैं तथा भिन्न-भिन्न प्रकार की जीविका और आश्रय अपनाते हैं॥31॥ | mahabharat अध्याय 13.50: वर्णसंकर संतानोंकी उत्पत्तिका विस्तारसे वर्णन । mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
जो लोग जाति का विचार न करके अपनी इच्छा से अन्य जातियों की स्त्रियों के साथ मैथुन करते हैं और जो यज्ञ करने के अधिकार से वंचित हैं, तथा साधु पुरुषों से भी वंचित हैं, ऐसे जाति से बाहर के पुरुषों से ही संकर संतानें उत्पन्न होती हैं और वे अपनी इच्छानुसार कार्य करते हैं तथा भिन्न-भिन्न प्रकार की जीविका और आश्रय अपनाते हैं॥31॥
Those who without considering the caste indulge in sexual intercourse with women of other castes according to their will and who are excluded from the rights of performing sacrifices and from saintly persons, from such persons outside the caste only, hybrid offspring are born and they do work according to their liking and adopt different kinds of livelihood and shelter.॥ 31॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥