श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 50: वर्णसंकर संतानोंकी उत्पत्तिका विस्तारसे वर्णन  »  श्लोक 29
 
 
श्लोक  13.50.29 
इत्येते संकरे जाता: पितृमातृव्यतिक्रमात्।
प्रच्छन्ना वा प्रकाशा वा वेदितव्या: स्वकर्मभि:॥ २९॥
 
 
अनुवाद
इस प्रकार माता-पिता के उत्परिवर्तन (वर्णों की विविधता का संयोग) से ये संकर जातियाँ उत्पन्न होती हैं। इनमें से कुछ जातियाँ दृश्यमान हैं और कुछ गुप्त। इन्हें इनके कर्मों से ही पहचानना चाहिए। 29॥
 
In this way, these hybrid races arise due to the mutation of parents (a combination of variation of characters). Some of these castes are visible and some are hidden. They should be recognized by their deeds only. 29॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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