Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 13.50.26-27: चाण्डाल पुरुष और निषाद स्त्री के संयोग से पाण्डुसौपाक जाति उत्पन्न होती है। यह जाति बाँस की टोकरियाँ आदि बनाकर अपना जीविकोपार्जन करती है। निषाद जब वैदेहा स्त्री के संसर्ग में आता है, तो अहिंदक उत्पन्न होता है, किन्तु जब वही स्त्री चाण्डाल के संसर्ग में आती है, तो सौपाक उत्पन्न होता है। सौपाक की जीविका चाण्डाल के समान ही होती है।॥26-27॥ | mahabharat अध्याय 13.50: वर्णसंकर संतानोंकी उत्पत्तिका विस्तारसे वर्णन । mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
चाण्डाल पुरुष और निषाद स्त्री के संयोग से पाण्डुसौपाक जाति उत्पन्न होती है। यह जाति बाँस की टोकरियाँ आदि बनाकर अपना जीविकोपार्जन करती है। निषाद जब वैदेहा स्त्री के संसर्ग में आता है, तो अहिंदक उत्पन्न होता है, किन्तु जब वही स्त्री चाण्डाल के संसर्ग में आती है, तो सौपाक उत्पन्न होता है। सौपाक की जीविका चाण्डाल के समान ही होती है।॥26-27॥
The Pandusaupaaka caste is born from the union of a Chandala man and a Nishada woman. This caste earns its livelihood by making bamboo baskets etc. When a Nishada comes in contact with a Vaideha woman, an Ahindaka is born, but when the same woman comes in contact with a Chandala, a Saupaaka is born. The livelihood of a Saupaaka is similar to that of a Chandala.॥26-27॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥