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mahabharat 13.50.25-26h: इस प्रकार, ये तीनों निम्न जाति के पुरुष अयोग्वी की संतान हैं। यदि निषाद जाति की स्त्री वैदेहक जाति के पुरुष के साथ समागम करती है, तो क्षुद्र, आन्ध्र और करवर नामक जातियों के पुत्र उत्पन्न होते हैं। इनमें क्षुद्र और आन्ध्र गाँव के बाहर रहकर जंगली जानवरों को मारकर जीविका चलाते हैं और करवर मरे हुए जानवरों की खाल का व्यापार करते हैं। इसलिए उन्हें चर्मकार कहा जाता है।   |   mahabharat अध्याय 13.50: वर्णसंकर संतानोंकी उत्पत्तिका विस्तारसे वर्णन   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 50: वर्णसंकर संतानोंकी उत्पत्तिका विस्तारसे वर्णन  »  श्लोक 25-26h
 
 
श्लोक  13.50.25-26h 
आयोगवीषु जायन्ते हीनवर्णास्तु ते त्रय:।
क्षुद्रो वैदेहकादन्ध्रो बहिर्ग्रामप्रतिश्रय:॥ २५॥
कारावरो निषाद्यां तु चर्मकार: प्रसूयते।
 
 
अनुवाद
इस प्रकार, ये तीनों निम्न जाति के पुरुष अयोग्वी की संतान हैं। यदि निषाद जाति की स्त्री वैदेहक जाति के पुरुष के साथ समागम करती है, तो क्षुद्र, आन्ध्र और करवर नामक जातियों के पुत्र उत्पन्न होते हैं। इनमें क्षुद्र और आन्ध्र गाँव के बाहर रहकर जंगली जानवरों को मारकर जीविका चलाते हैं और करवर मरे हुए जानवरों की खाल का व्यापार करते हैं। इसलिए उन्हें चर्मकार कहा जाता है।
 
Thus, these three low caste men are the children of Ayogvi. If a woman of Nishad caste has intercourse with a man of Vaidehak caste, then sons of the castes named Kshudra, Andhra and Karavar are born. Among these, Kshudra and Andhra live outside the village and make a living by killing wild animals and Karavar does business of skins of dead animals. Hence, he is called a tanner. 25 1/2.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)