श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 50: वर्णसंकर संतानोंकी उत्पत्तिका विस्तारसे वर्णन  »  श्लोक 21
 
 
श्लोक  13.50.21 
निषादो मद्‍गुरं सूते दासं नावोपजीविनम्।
मृतपं चापि चाण्डाल: श्वपाकमिति विश्रुतम्॥ २१॥
 
 
अनुवाद
निषाद के वीर्य और मागध सैरंध्री के गर्भ से मद्गुर जाति का एक पुरुष उत्पन्न होता है, जिसका दूसरा नाम दास है। वह नाव चलाकर जीविका चलाता है। चांडाल और मागध सैरंध्री के संयोग से श्वपाक नाम से प्रसिद्ध अधम चांडाल उत्पन्न होता है। वह मृतकों के रक्षक का कार्य करता है। 21॥
 
From the semen of Nishad and the womb of Magadha Sairandhri, a man of Madgur caste is born, whose other name is Das. He earns his living by boat. Due to the union of Chandal and Magadhi Sairandhri, the famous Adham Chandal by the name of Shvapak is born. He works as a guardian of the dead. 21॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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