श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 50: वर्णसंकर संतानोंकी उत्पत्तिका विस्तारसे वर्णन  »  श्लोक 19
 
 
श्लोक  13.50.19 
अगम्यागमनाच्चैव जायते वर्णसंकर:।
बाह्यानामनुजायन्ते सैरन्ध्रॺां मागधेषु च।
प्रसाधनोपचारज्ञमदासं दासजीवनम्॥ १९॥
 
 
अनुवाद
अविवाहित स्त्री के साथ सहवास करने से संकर संतान उत्पन्न होती है। यदि मगध जाति की सैरंध्री स्त्रियों का अन्य जाति के पुरुषों के साथ सहवास हो, तो उससे उत्पन्न पुत्र राजाओं के समान पुरुषों को सजाने तथा अंगराग लगाने आदि की सेवाओं का जानकार होगा और दास न होते हुए भी दासता का जीवन व्यतीत करने में समर्थ होगा। 19॥
 
By mating with an unmarried woman, a hybrid child is born. If there is intercourse with Sairandhri women of Magadh caste with men of outside caste, then the son born from it will be knowledgeable about the services of adorning men like kings and applying cosmetics etc. and despite not being a slave, he will be able to live a life of slavery. 19॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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