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mahabharat 13.50.17: जैसे शूद्र ब्राह्मणी के गर्भ से चाण्डाल नामक पराया पुत्र उत्पन्न करता है, वैसे ही उस पराया जाति का पुरुष ब्राह्मणी तथा अन्य पराये वर्णों सहित चारों वर्णों की स्त्रियों के साथ समागम करके अपने से नीची जाति का पुत्र उत्पन्न करता है॥ 17॥   |   mahabharat अध्याय 13.50: वर्णसंकर संतानोंकी उत्पत्तिका विस्तारसे वर्णन   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 50: वर्णसंकर संतानोंकी उत्पत्तिका विस्तारसे वर्णन  »  श्लोक 17
 
 
श्लोक  13.50.17 
यथा शूद्रोऽपि ब्राह्मण्यां जन्तुं बाह्यं प्रसूयते।
एवं बाह्यतराद् बाह्यश्चातुर्वर्ण्यात् प्रजायते॥ १७॥
 
 
अनुवाद
जैसे शूद्र ब्राह्मणी के गर्भ से चाण्डाल नामक पराया पुत्र उत्पन्न करता है, वैसे ही उस पराया जाति का पुरुष ब्राह्मणी तथा अन्य पराये वर्णों सहित चारों वर्णों की स्त्रियों के साथ समागम करके अपने से नीची जाति का पुत्र उत्पन्न करता है॥ 17॥
 
Just as a Shudra produces an outsider son called a Chandala from the womb of a Brahmin woman, similarly, a man belonging to that outsider caste, by having intercourse with the women of the four castes including the Brahmin and other external castes, produces a son belonging to a lower caste than himself.॥ 17॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)