| श्री महाभारत » पर्व 13: अनुशासन पर्व » अध्याय 50: वर्णसंकर संतानोंकी उत्पत्तिका विस्तारसे वर्णन » श्लोक 16 |
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| | | | श्लोक 13.50.16  | ते चापि सदृशं वर्णं जनयन्ति स्वयोनिषु।
परस्परस्य दारेषु जनयन्ति विगर्हितान्॥ १६॥ | | | | | | अनुवाद | | इस प्रकार वर्णसंकर पुरुष अपनी ही जाति की स्त्रियों से अपनी ही जाति के पुत्र उत्पन्न करते हैं और यदि वे भिन्न-भिन्न जातियों की स्त्रियों से समागम करते हैं, तो अपनी से भी अधिक नीच सन्तान उत्पन्न करते हैं॥16॥ | | | | In this manner, men of mixed castes produce sons of the same caste as themselves from women of the same caste, and if they have intercourse with women of different castes, they produce offspring which are even more despicable than themselves.॥ 16॥ | | ✨ ai-generated | | |
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