श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 50: वर्णसंकर संतानोंकी उत्पत्तिका विस्तारसे वर्णन  »  श्लोक 14
 
 
श्लोक  13.50.14 
एतेऽपि सदृशान् वर्णान् जनयन्ति स्वयोनिषु।
मातृजात्या: प्रसूयन्ते ह्यवरा हीनयोनिषु॥ १४॥
 
 
अनुवाद
जब ये संकर अपनी ही जाति की स्त्री के साथ समागम करते हैं, तो अपनी ही जाति के पुत्रों को जन्म देते हैं और जब ये निम्न जाति की स्त्री के साथ समागम करते हैं, तो निम्न जाति के पुत्र उत्पन्न होते हैं। ये पुत्र अपनी माता की जाति के माने जाते हैं॥14॥
 
When these hybrids mate with a woman of their own caste, they give birth to sons of the same caste as themselves and when they mate with a woman of a lower caste, inferior children are born. These children are considered to be of their mother's caste.॥ 14॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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