श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 5: स्वामिभक्त एवं दयालु पुरुषकी श्रेष्ठता बतानेके लिये इन्द्र और तोतेके संवादका उल्लेख  »  श्लोक 4
 
 
श्लोक  13.5.4 
तत्र चामिषलुब्धेन लुब्धकेन महावने।
अविदूरे मृगान् दृष्ट्वा बाण: प्रतिसमाहित:॥ ४॥
 
 
अनुवाद
उस महान वन में थोड़ी दूर जाने पर मांस-पिपासु शिकारी ने कुछ हिरणों को देखकर उन पर बाण चलाया ॥4॥
 
After going a little distance into that great forest, the meat-hungry hunter saw some deer and shot an arrow at them. ॥4॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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