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mahabharat 13.5.31: महाराज! वह तोता भी अपनी आयु समाप्त होने पर अपने दयालु व्यवहार के कारण इन्द्रलोक को प्राप्त हुआ ॥31॥   |   mahabharat अध्याय 13.5: स्वामिभक्त एवं दयालु पुरुषकी श्रेष्ठता बतानेके लिये इन्द्र और तोतेके संवादका उल्लेख   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  13.5.31 
शुकश्च कर्मणा तेन आनृशंस्यकृतेन वै।
आयुषोऽन्ते महाराज प्राप शक्रसलोकताम्॥ ३१॥
 
 
अनुवाद
महाराज! वह तोता भी अपनी आयु समाप्त होने पर अपने दयालु व्यवहार के कारण इन्द्रलोक को प्राप्त हुआ ॥31॥
 
Maharaj! That parrot also attained Indraloka due to his compassionate behavior after his life span ended. ॥ 31॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)