श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 5: स्वामिभक्त एवं दयालु पुरुषकी श्रेष्ठता बतानेके लिये इन्द्र और तोतेके संवादका उल्लेख  »  श्लोक 21
 
 
श्लोक  13.5.21 
अनतिक्रमणीयानि दैवतानि शचीपते।
यत्राभवत् तव प्रश्नस्तन्निबोध सुराधिप॥ २१॥
 
 
अनुवाद
शची वल्लभ! ईश्वर का उल्लंघन नहीं किया जा सकता। देवराज! जिसके विषय में आपने प्रश्न किया है, उसकी बात सुनिए।
 
Sachi Vallabh! God cannot be violated. Devraj! Listen to the one about whom you have asked the question.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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