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श्लोक 13.5.21  |
अनतिक्रमणीयानि दैवतानि शचीपते।
यत्राभवत् तव प्रश्नस्तन्निबोध सुराधिप॥ २१॥ |
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| अनुवाद |
| शची वल्लभ! ईश्वर का उल्लंघन नहीं किया जा सकता। देवराज! जिसके विषय में आपने प्रश्न किया है, उसकी बात सुनिए। |
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| Sachi Vallabh! God cannot be violated. Devraj! Listen to the one about whom you have asked the question. |
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