श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 5: स्वामिभक्त एवं दयालु पुरुषकी श्रेष्ठता बतानेके लिये इन्द्र और तोतेके संवादका उल्लेख  »  श्लोक 20
 
 
श्लोक  13.5.20 
भीष्म उवाच
तदुपश्रुत्य धर्मात्मा शुक: शक्रेण भाषितम्।
सुदीर्घमतिनि:श्वस्य दीनो वाक्यमुवाच ह॥ २०॥
 
 
अनुवाद
भीष्म कहते हैं - राजन् ! इन्द्र के ये वचन सुनकर धर्मात्मा शुक ने गहरी साँस लेकर विनीत स्वर में ये वचन कहे - ॥20॥
 
Bhishma says - King! On hearing these words of Indra, the virtuous Shuka took a deep breath and said these words in a humble tone - ॥20॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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