श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 5: स्वामिभक्त एवं दयालु पुरुषकी श्रेष्ठता बतानेके लिये इन्द्र और तोतेके संवादका उल्लेख  »  श्लोक 2
 
 
श्लोक  13.5.2 
भीष्म उवाच
अत्राप्युदाहरन्तीममितिहासं पुरातनम्।
वासवस्य च संवादं शुकस्य च महात्मन:॥ २॥
 
 
अनुवाद
भीष्म बोले, "युधिष्ठिर! इस विषय में भी महाबुद्धिमान तोते और इन्द्र के संवाद की प्राचीन कथा का उदाहरण दिया जाता है॥ 2॥
 
Bhishma said, "Yudhishthira! In this matter also, an example is given of the ancient story of the conversation between the great-minded parrot and Indra.॥ 2॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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