श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 5: स्वामिभक्त एवं दयालु पुरुषकी श्रेष्ठता बतानेके लिये इन्द्र और तोतेके संवादका उल्लेख  »  श्लोक 19
 
 
श्लोक  13.5.19 
गतायुषमसामर्थ्यं क्षीणसारं हतश्रियम्।
विमृश्य प्रज्ञया धीर जहीमं स्थविरं द्रुमम्॥ १९॥
 
 
अनुवाद
हे धीर शुक! इस वृक्ष की आयु समाप्त हो गई है, इसकी शक्ति नष्ट हो गई है। इसका सार नष्ट हो गया है और इसकी शोभा भी नष्ट हो गई है। इन सब बातों पर बुद्धि से विचार करके अब इस वृद्ध वृक्ष को त्याग दो।॥19॥
 
Patient Shuka! The life of this tree is over, its power is lost. Its essence is diminished and its beauty is also lost. Thinking over all these things with your intellect, now abandon this old tree.'॥19॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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