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mahabharat 13.5.14: उनके ऐसा पूछने पर शुक ने सिर झुकाकर उन्हें प्रणाम किया और कहा - 'देवराज! आपका स्वागत है। मैंने अपनी तपस्या के बल से आपको पहचान लिया है।'   |   mahabharat अध्याय 13.5: स्वामिभक्त एवं दयालु पुरुषकी श्रेष्ठता बतानेके लिये इन्द्र और तोतेके संवादका उल्लेख   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  13.5.14 
अथ पृष्ट: शुक: प्राह मूर्ध्ना समभिवाद्य तम्।
स्वागतं देवराज त्वं विज्ञातस्तपसा मया॥ १४॥
 
 
अनुवाद
उनके ऐसा पूछने पर शुक ने सिर झुकाकर उन्हें प्रणाम किया और कहा - 'देवराज! आपका स्वागत है। मैंने अपनी तपस्या के बल से आपको पहचान लिया है।'
 
On his asking this, Shuka bowed his head and saluted him and said - 'Devraj! You are welcome. I have recognized you by the power of my penance.'
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)