Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 13.5.11: अथवा इसमें आश्चर्य की कोई बात नहीं है; क्योंकि सब प्राणियों में सब प्रकार की बातें सर्वत्र दिखाई देती हैं - ऐसा विचार मन में आने पर इन्द्र का मन शान्त हो गया। 11. | mahabharat अध्याय 13.5: स्वामिभक्त एवं दयालु पुरुषकी श्रेष्ठता बतानेके लिये इन्द्र और तोतेके संवादका उल्लेख । mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
अथवा नात्र चित्रं हि अभवद् वासवस्य तु।
प्राणिनामपि सर्वेषां सर्वं सर्वत्र दृश्यते॥ ११॥
अनुवाद
अथवा इसमें आश्चर्य की कोई बात नहीं है; क्योंकि सब प्राणियों में सब प्रकार की बातें सर्वत्र दिखाई देती हैं - ऐसा विचार मन में आने पर इन्द्र का मन शान्त हो गया। 11.
Or there is nothing surprising in this; because all kinds of things are seen in all creatures everywhere - on having such a thought in his mind, Indra's mind became calm. 11.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥