श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 49: ब्राह्मण आदि वर्णोंकी दायभाग-विधिका वर्णन  »  श्लोक 61
 
 
श्लोक  13.49.61 
एवं जातिषु सर्वासु सवर्ण: श्रेष्ठतां गत:।
महर्षिरपि चैतद् वै मारीच: काश्यपोऽब्रवीत्॥ ६१॥
 
 
अनुवाद
इस प्रकार सभी जातियों में समान वर्ण की स्त्री से उत्पन्न पुत्र श्रेष्ठ होता है। मरीचि के पुत्र महर्षि कश्यप ने भी यही बात कही है।
 
In this way, in all castes, the son born from a woman of the same caste is the best. Maharishi Kashyap, son of Marichi, has also said the same thing. 61.
 
इति श्रीमहाभारते अनुशासनपर्वणि दानधर्मपर्वणि विवाहधर्मे रिक्थविभागोनाम सप्तचत्वारिंशोऽध्याय:॥ ४७॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत अनुशासनपर्वके अन्तर्गत दानधर्मपर्वमें विवाहधर्मके अन्तर्गत पैतृक धनका विभागनामक सैंतालीसवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ ४७॥

 
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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