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mahabharat 13.49.59: हे पुरुषों के स्वामी! समान जाति की स्त्रियों से उत्पन्न पुत्रों में यह दूसरा लक्षण ध्यान देने योग्य है। विवाह की विशिष्टता के कारण वे पुत्र भी विशिष्टता प्राप्त कर लेते हैं। अर्थात् प्रथम विवाह की स्त्री से उत्पन्न पुत्र श्रेष्ठ और द्वितीय विवाह की स्त्री से उत्पन्न पुत्र अधम होता है ॥59॥   |   mahabharat अध्याय 13.49: ब्राह्मण आदि वर्णोंकी दायभाग-विधिका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 49: ब्राह्मण आदि वर्णोंकी दायभाग-विधिका वर्णन  »  श्लोक 59
 
 
श्लोक  13.49.59 
समवर्णासु जातानां विशेषोऽस्त्यपरो नृप ।
विवाहवैशिष्ट्यकृत: पूर्वपूर्वो विशिष्यते॥ ५९॥
 
 
अनुवाद
हे पुरुषों के स्वामी! समान जाति की स्त्रियों से उत्पन्न पुत्रों में यह दूसरा लक्षण ध्यान देने योग्य है। विवाह की विशिष्टता के कारण वे पुत्र भी विशिष्टता प्राप्त कर लेते हैं। अर्थात् प्रथम विवाह की स्त्री से उत्पन्न पुत्र श्रेष्ठ और द्वितीय विवाह की स्त्री से उत्पन्न पुत्र अधम होता है ॥59॥
 
O Lord of men! This second characteristic is worth paying attention to in the sons born to women of the same caste. Due to the uniqueness of the marriage, those sons also become unique. That is, the son born to the woman of the first marriage is superior and the son born to the woman of the second marriage is inferior. ॥ 59॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)